जब्र शायरी | जब्र पर दर्द भरी शायरी हिंदी और इंग्लिश में
जब्र शायरी: 100+ जब्र पर दर्द भरी शायरी हिंदी और इंग्लिश में
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसी परिस्थितियों में डाल देती है जहाँ अपनी मर्जी से ज्यादा “जब्र” चलता है। रिश्तों में जब्र, हालातों में जब्र, समाज का दबाव — ये सब इंसान के दिल पर गहरा असर छोड़ते हैं। अगर आप भी जब्र के दर्द को महसूस कर चुके हैं और उसे शब्दों में ढालना चाहते हैं, तो यहाँ दी गई 50 हिंदी और 50 इंग्लिश शायरियाँ आपके जज्बातों को आवाज़ देंगी।
जब्र पर हिंदी शायरी (50 Shayari)
जब्र और हालात की शायरी
जब्र की दीवारों में कैद हैं अरमान,
दिल रोता है मगर चेहरे पर मुस्कान।
हालातों का जब्र कुछ यूँ सहा हमने,
खुद को खोकर भी खुद को रखा हमने।
जब्र की आंधी में सपने उड़ गए,
हम खामोश रहे और लफ्ज़ मुड़ गए।
जिसे अपना समझा वही जब्र कर गया,
दिल का हर कोना वीरान कर गया।
जब्र सहकर भी मुस्कुराना पड़ा,
अपनों के लिए खुद को मिटाना पड़ा।
रिश्तों में जब्र की शायरी
रिश्तों में जब्र का असर दिखता है,
हँसी के पीछे दर्द छुपा दिखता है।
तुम्हारा प्यार भी जब्र सा लगा,
दिल को हर बार सजा सा लगा।
जब्र के साए में जीते रहे,
अपनी ही चाहतों को पीते रहे।
रिश्ते जब जब्र बन जाएं,
दिल अपने ही घर में घबराएं।
मोहब्बत में जब्र मंज़ूर था,
बस तेरा साथ ज़रूर था।
समाज और जब्र
समाज के जब्र ने तोड़ दिया,
सपनों का हर मोड़ दिया।
लोगों की बातों का जब्र सहा,
खामोशी को ही हमने कहा।
भीड़ में भी तनहा थे हम,
जब्र का बोझ उठाए थे हम।
समाज की रीत भी अजीब है,
जब्र यहाँ नसीब है।
जो अलग चले वही जब्र सहें,
ये दुनिया ऐसे ही नियम गढ़े।
दिल का दर्द और जब्र
दिल पर जब्र की चोट लगी,
खामोशी में भी आवाज़ जगी।
आँखों में आँसू, लब पर हँसी,
जब्र की ये कैसी बसी।
दर्द को छुपाना जब्र था,
मुस्कुराना भी सब्र था।
दिल हर बार टूटा मगर,
जब्र ने फिर से जोड़ा मगर।
जब्र से जो सीखा हमने,
खुद को मजबूत देखा हमने।
जब्र और मोहब्बत
मोहब्बत में जब्र सहा,
दिल ने फिर भी तेरा कहा।
तेरी जुदाई भी जब्र थी,
मेरी खामोशी भी सब्र थी।
जब्र से भरी थी वो रात,
टूट गए सारे जज्बात।
मोहब्बत अगर जब्र बने,
तो दिल भी पत्थर बने।
तेरे इश्क़ का जब्र सहा,
हर दर्द को हमने कहा।
जब्र और जिंदगी
जिंदगी का हर मोड़ जब्र लगा,
फिर भी जीना जरूरी लगा।
जब्र ने हमें सिखाया है,
मजबूत बनना बताया है।
हर ठोकर में जब्र मिला,
पर हौसला भी साथ चला।
जिंदगी जब्र का नाम सही,
पर उम्मीद भी कम नहीं।
जब्र में भी जीना सीखा,
हर दर्द को पीना सीखा।
सब्र और जब्र
जब्र के आगे सब्र झुका,
दिल हर बार फिर से रुका।
सब्र किया हर बात पर,
जब्र मिला हर साथ पर।
जब्र ने सब्र सिखाया,
जीना फिर आसान बनाया।
सब्र और जब्र की ये जंग,
दिल में बजती रही हर ढंग।
जब्र सहकर सब्र रखा,
खुद को फिर से जिंदा रखा।
खामोशी और जब्र
खामोशी भी जब्र थी,
बात करना भी सब्र थी।
लफ्ज़ों का गला घोंट दिया,
जब्र ने हमें चुप कर दिया।
खामोशियाँ बोलती रहीं,
जब्र की कहानी खोलती रहीं।
दिल चीखा मगर लब सिले,
जब्र के धागों से गिले।
खामोशी में जब्र छुपा था,
हर दर्द वहीं रुका था।
जब्र और टूटे सपने
सपनों पर जब्र हुआ,
दिल फिर भी खड़ा हुआ।
टूटे ख्वाबों की कहानी,
जब्र की थी निशानी।
जब्र ने सपने छीने,
पर हौसले नहीं छीने।
हर ख्वाब जब्र में टूटा,
दिल फिर भी न झुका।
सपनों का जब्र सहा,
उम्मीदों को जिंदा रखा।
जब्र से उबरने की शायरी
जब्र ने झुकाया जरूर,
पर तोड़ा नहीं भरपूर।
हर जब्र के बाद सवेरा है,
दिल को ये ही सहारा है।
जब्र से लड़ना सीखा,
खुद को फिर से जीता सीखा।
जब्र आया और चला गया,
हौसला मेरा बढ़ा गया।
जब्र की रात ढल जाएगी,
नई सुबह फिर आएगी।
जब्र Shayari in English (50 Shayari)
Oppression and Pain Shayari
Oppression chained my dreams,
Yet hope flowed in silent streams.
Under forced smiles I stayed,
While my broken heart quietly prayed.
The weight of force I bore,
Still I stood stronger than before.
Oppression bruised my soul,
But never stole my goal.
In silence I cried at night,
Fighting oppression with inner light.
Forced Love and Emotions
Love felt like silent force,
Yet I followed its course.
Your absence was a silent chain,
Wrapped around my heart in pain.
Oppressed feelings stayed inside,
Behind every smile I tried.
Love under pressure fades,
Leaving behind darker shades.
Even in forced affection’s flame,
My heart whispered your name.
Society and Oppression
Society’s rules pressed tight,
Dimming my inner light.
Crowds around yet I was lone,
Oppression carved me in stone.
They judged, they forced, they claimed,
Yet my spirit stayed untamed.
Oppression built tall walls,
Still my courage never falls.
The world forced me to bend,
But I refused to end.
Silence and Strength
Silence screamed inside,
While tears I tried to hide.
Oppression taught me grace,
In every painful phase.
Forced calm upon my face,
While storms I had to embrace.
Pain wrapped tight in night,
Yet I rose to fight.
Under pressure I grew,
Stronger than I ever knew.
Broken Dreams
Dreams crushed by force,
Still hope found its course.
Oppression stole my sleep,
But not the promises I keep.
Broken wings yet I fly,
Touching the wounded sky.
Forced down to the ground,
Still courage I found.
Dreams bend, not break,
For hope’s eternal sake.
Rising After Oppression
After every forced night,
Comes a dawn of light.
Oppression made me wise,
Taught me how to rise.
They tried to cage my fire,
But fueled my desire.
Every forced scar I bear,
Turned into strength and prayer.
Oppression shaped my soul,
But never took control.
FAQs - जब्र शायरी
जब्र का मतलब क्या होता है?
जब्र का अर्थ है किसी पर ज़बरदस्ती करना, दबाव डालना या उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ करवाना।
जब्र पर शायरी क्यों पढ़ी जाती है?
क्योंकि जब्र से जुड़ा दर्द और भावनाएँ गहरी होती हैं, जिन्हें शायरी के माध्यम से व्यक्त करना आसान होता है।
क्या जब्र और सब्र में अंतर है?
हाँ, जब्र मजबूरी या दबाव है जबकि सब्र धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है।
क्या ये शायरी सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं?
हाँ, आप इन शायरियों को व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर शेयर कर सकते हैं।
External Reference
जब्र और सामाजिक दबाव की अवधारणा को विस्तार से समझने के लिए Wikipedia – Oppression देख सकते हैं।
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